नाम: तोला बाई, पति: रामू

जाति: गाड़िया-लुहार

गाँव: बडौद

जिला: बून्दी

तोला बाई 25 वर्ष की महिला है जिसने दो महीने पहले एक बच्चे को जन्म दिया. उसके पैर में चोट भी लगी हुई थी. तोला बाई के तीन बच्चे हैं. उसके पास राशन कार्ड नही है. उसके पास न रहने के लिए ज़मीन है और ना उसके पास या उसके पति के पास कोई काम धंधा है. उसके पास तो सिर ढकने के लिए झोपड़ी तक  नही है. काम के लिए गाँव-गाँव भटकते रहते हैं. माँ और बच्चे सर्दी में भी खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर हैं.

तोला बाई की तीसरी डेलिवरी उसको रु. 1400 मिलें. रु. 1400 में तोला बाई कैसे अपने और बच्चे की दवाइयों का खर्चा पूरा कर सकती है? पैर में लगी चोट को भी ठीक नहीं कर पा रही है.

भीड़ में खड़े एक आदमी ने कहा की, “लोहार जाति को तो श्राप मिला हुआ है, ये लोग  कभी भी एक जगह पर नही रह सकते हैं. यदि वे एक जगह रहते हैं तो धरती पर भूकंप आ जाएगा. इसी मानसिकता के कारण हम लोग कभी भी इन लोहार जाति के लोगों को एक जगह रहने नहीं देते हैं”.

धरती पर भूकंप इनके एक जगह रहने से नहीं बल्कि हमारी पुरानी और खराब सोच से ज़रूर आएगा. धर्म, जाति सब तो पुरानी कही गयी बातें है. अब वक़्त में इन बातों को बदलकर सभी को एक नज़र से देखना है. जात-पात से नहीं, इंसान की पहचान उसके काम और दूसरे इंसान के प्रति प्रेमभाव रखने से होनी चाहिए.