आज 72 वें दिन की पहली सभा नीम का थाना (सीकर) मुख्य बाजार में रैली के रूप पहुंची तथा सभा का आयोजन किया गया |सभा में शहर की प्रमुख समस्याएं सामने आई जो इस प्रकार है-
1.मिशन परिवर्तन के संचालन कर्ता ने कहा कि रेल फाटक पर ओवरब्रिज नही है जिसके कारण यातायात जाम में लोगो को घंटो तक इंतजार करना पड़ता है जिससे अनेक मरीजो की मौत हो चुकी है|
2.पीने के पानी की भारी समस्या है जिसका मुख्य कारण अवैध खनन है| शुष्क क्षेत्र घोषित होने के बावजूद 18-20 लाख लीटर पानी प्रतिदिन पत्थर की धुलाई में व्यर्थ किया जा रहा है जिससे लोगो को फ्लोराइड पानी पीना पड़ रहा है इस कारण बिमारियां हो रही है |
3.S.D.M. द्वारा अपने पद का दुरूपयोग| जैसे- नगर पालिका द्वारा टेक्सी स्टैंड हटाने पर टेक्सी चालको के शिकायत करने पर S.D.M. ने टेक्सी चालको पर धारा 144 (भारतीय दंड संहिता ) लगा दी |
4.भूमि अधिकरण की समस्या जैसे – महावा गाँव की खेती की जमीन को RIICO वाले जबरदस्ती हड़प रहे है,महिलाये 4 साल से जमीन के लिए लड़ रही है,”खेती बाड़ी करने दो,हमें ख़ुशी से जीने दो” (महिलाओं द्वारा लगाया गया नारा ) |
Jawabdehi Yatra
Neem Ka Thana, Sikar

Today on the 72nd day of the Yatra, we arrived at Neem Ka Thana, Sikar. During the course of the meeting, the following issues, specific to this area, were raised –
1. Delay in the building of a railway overbridge – The founder of Mission Parivartan raised this as a key concern. The delay has not only cost people time and money but has also claimed lives.

2. Shortage of drinking water made worse by mining – As Sikar falls in a dry zone, water is a precious resource. However, mining companies allegedly use 18-20 lakh litres of water per day to wash stones leaving residents to rely on fluoride heavy water for drinking purposes.

3. Abuse of power by the S.D.M – An attempt by taxi drivers to register a complaint regarding the closure of the taxi stand resulted in the S.D.M issuing section 144 of the IPC. This absurd act has resulted in a diminished faith in the district bureaucracy.

4. The problem of land acquisition – Women of Mahava village have been protesting the forceful acquisition of their farm land by RIICO for 4 years. The movement to protect their land is summed up in their words , “Kheti badi karne do, humein khushi se jeene do” (let us farm, let us live in peace).

खंडेला (सीकर)
आज 72 वें दिन की दूसरी सभा खंडेला (सीकर) मुख्य बाजार में रैली के रूप पहुंची तथा सभा का आयोजन किया गया |सभा में शहर की प्रमुख समस्याएं सामने आई जो इस प्रकार है-
1. खंडेला अस्पताल में महिला स्टाफ के पद रिक्त- (उदाहरण- क्षीत्रमल जी ने बताया अस्पताल में महिला स्टाफ नही होने के कारण प्रसव मे बहुत समस्या आती है जिसके कारण डॉक्टर दुसरे अस्पताल में रेफर कर देते है और वहाँ पहुंचते-पहुँचते कई बार जच्चा-बच्चा दोनों की मौत भी हो जाती है |
2. पीने के पानी की समस्या – पानी बहुत दूर से लाना पड़ता है और खरीद कर पीना पड़ रहा है|
3. दवाइयों की समस्या – दवाईयां पूर्ण रूप से उपलब्ध नही है |
अंत में यात्रा की सदस्य कानी बाई द्वारा कहा गया कि “ सरकारी कर्मचारी समय पर काम नही कर पाते है तो हमें कह दीजिये हम काम सिखा देंगे “ |

Khandela, Sikar

The next stop of the yatra was at Khandela. Here people, both from the manch as well as the gathering expressed the following concerns –

1. Lack of women hospital staff at the public hospital – This has resulted in a reduced quality of healthcare for women in particular. For instance patients are referred to a different hospital (often further away)during delivery which puts their pregnancy and life at risk.
2. Drinking water is not available locally or freely.
3. Medicines are ill stocked.

The meeting ended with a member of the yatra, Kani bai, saying “If government officials aren’t able to perform their duties on time, tell us. We’ll teach them the value of work! “

खाटूश्याम (सीकर )
आज 72 वें दिन की अंतिम सभा खाटूश्याम (सीकर) मुख्य बाजार में रैली के रूप पहुंची जहाँ कुछ मुद्दे सामने आये जिसमें यात्रा के साथी शंकर जी द्वारा सरकारी स्कूलो की स्थिति के बारे में बतया गया की वहा बच्चे ही नही है और लगभग सभी बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने जा रहे है | अत: जवाबदेही यात्रा का उद्देश्य हैं की सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को सशक्त किया जाए ताकि यंहा के बच्चे प्राइवेट स्कूल में ना पढकर सारकारी स्कूल मे पूर्ण शिक्षा ग्रहण कर पाएं |
तथा यात्रा की मांग है कि जितने भी सरकारी अधिकारियों के बच्चे हैं वो सभी सरकारी स्कूलों में पढने जाएँ ताकि सरकारी स्कूलों की स्थिति में सुधार आए |
Khatushyam, Sikar

The last stop of the Jawabdehi yatra, for the day, was at Khatushyam. As in other meetings, members of the yatra explained the purpose of this movement and presented its demands. Amongst other issues discussed, primary focus was laid on the prevalence of private schools in Sikar district.

A central idea behind the Jawabdehi yatra is that state institutions be strengthened. Government officials must be held accountable for how public schools are run; privatisation cannot be the solution. One demand of the yatra therefore is that all state officials’ children should be made to study in public schools in Rajasthan, a move that would guarantee an improvement in quality of education.