इन सभी गाँव में आदिवासी और भील समाज के लोग रहते हैं. यह सभी छोटी-मोटी खेती और मज़दूरी करके अपना गुज़ारा करते हैं. इन सभी गाँव में से लगभग 80 % लोगों को  P में डाल दिया गया है. राशन की दुकान से उन्हें हर APL कार्ड पर 10 kg ही राशन मिलता है, चाहे परिवार के सदस्य कितने भी क्यों ना हो. इनको किरोसीन भी नहीं मिलता है. कोई झगड़ा करे तो उसे 2 लीटर मिल जाता है.

ग्रामवासियों ने सरपंच से लेकर कलेक्टर तक इसकी शिकायत की पर कोई फायदा नहीं हुआ है. राशन की दुकान कभी समय पर भी नहीं खुलती है. दुकानदार रुक्मिणी आर्या का गाँववालों के प्रति बहुत खराब है. सब चाहते है की उन्हे हटाकर किसी भी गाँव से गाँववालों को लगाया जाए.