मुकेश 22 साल का नौजवान है. उसके दोनो पैर बचपन में खराब हो गये थे. उसने बताया की उसे बुखार आया था, उसके बाद उसके पैर खराब हो गये. बचपन में ही उसके माता-पिता चल बसे.

पहले मुकेश को विकलांग पेंशन मिलती थी परंतु माता-पिता के जाने बाद से ही उसकी पेंशन बंद हो गयी. उसकी भाभी ने उसका राशन कार्ड भी उसके पास रख लिया और अब वापस नही दे रही है.

मुकेश को उसके मामा-मामी अपने साथ लेकर आ गये. तब से अब तक मुकेश मामा के घर पर ही रहता है. वह अपनी मामी के साथ बाज़ार में सब्ज़ी बेचता है.

मुकेश 5वीं तक ही पढ़ पाया क्योंकि आगे की स्कूल दूर थी और कोई ले जानेवाला भी नहीं था. उसके पास कोई भी सुविधा नही है – ना राशन, ना पेंशन और ना ही कोई आवास योजना.