रजीना देवी पिछले 4 साल से विधवा है. उनका राशन कार्ड भी BPL है. उन्होंने विधवा पेंशन का फॉर्म भरा था. उनके साथ और 12 लोगों ने पेंशन का फॉर्म भरा था. उन सभी की पेंशन शुरू हुई पर रजीना की नही. हर बार डाकिया रजीना को मना कर देता था.

फिर एक दिन डाकिया ने रजीना को रु. 300 दिए और कहा की वो अपनी जेब से दे रहा है. फिर उसके 2 महीने बाद रु. 500 और दिए. उसके बाद रजीना को पेंशन नहीं मिली. डाकिया ने कहा की उनका नाम नहीं है. जब रजीना का बेटा पंचायत समिति में गया तो उसका नाम लिस्ट में था. यदि सरकार पेंशन भेज रही है तो पेंशनधारी तक पेंशन पहुँचती क्यों नहीं?