संवैधानिक अधिकारों को सुनिश्चित करने और सरकारी तंत्र की जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से निकाली जा रही जवाबदेही यात्रा कल देर शाम जोधपुर के शेरगढ़ में पहुंची.

आज सुबह शेरगढ़ में एक रैली निकालकर यात्रा ने जवाबदेही कानून के लिए समर्थन हासिल किया. यहाँ हुई एक नुक्कड़ सभा को संबोधित करते हुए सूचना रोज़गार अभियान के वरिष्ठ कार्यकर्ता शंकर सिंह ने कहा कि इतनी मोटी तनख्वाह लेने के बाद भी सरकारी अधिकारिओं और कर्मचारिओं की कोई जवाबदेही नहीं है. जिस प्रकार एक मजदूर के लिए काम निर्धारित होता है और काम नहीं करने पर उसे उसका खामियाजा भुगतना पड़ता है उसी प्रकार इन कर्मचारिओं और अधिकारिओं के स्पष्ट जॉब चार्ट बने और काम नहीं करने पर इनके ऊपर जुर्माना लगाया जाये ऐसा एक कानून राज्य सरकार द्वारा बनाया जाना चाहिए. जो लोग रिश्वत मांगे उन्हें तुरंत जेल भेजा जाना चाहिए. साथ ही उन्होंने कहा कि अब हम प्रशासन के इस ढुलमुल और टालमटोल वाले रवैये को बर्दाश्त नहीं करेंगे.

जय भीम विकास शिक्षण संस्थान शेरगढ़ के तुलसीदास ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज भी आम व्यक्ति और विशेषतः दलितों और वंचितों के हकों को कुचला जा रहा है. उन्होंने कहा कि जब तक सरकारी तंत्र की असंवेदनशीलता, और ढुलमुल रवैये को ठीक नहीं किया जाता तब तक आम लोगों का जीवन नहीं सुधर सकता. जवाबदेही कानून के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि यह कानून नौकरशाही को ठीक से काम करने के लिए पाबंद करेगा और आम आदमी के हकों को सुरक्षित करेगा.

उल्लेखनीय है कि वह सूचना एवं रोज़गार अधिकार अभियान (राजस्थान के 100 से भी अधिक जन-संगठनों का समूह) ही था जिसने देश में सूचना के अधिकार कानून, 2005 और महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी कानून, 2006 को पास कराने में अहम भूमिका निभाई थी. दिहाड़ी मजदूरी पर काम कर गुज़ारा करने वाले लोग, बूढी एवं एकल महिलाएं, भूमिहीन व लघु कृषक, देश के नामचीन कॉलेजों में पढने वाले विद्यार्थी और शिक्षा, स्वास्थय, आदिवासी एवं दलितों के अधिकार और गरीब और वंचित वर्गों के हितों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता, पत्रकार, बुद्धिजीवी, शिक्षक, वकील, फ़िल्मकार, आदि कई तरह के लोग; कुछ ठेठ देहाती तो कुछ ऐसे जिन्होंने अपने जीवन में कभी कोई गाँव तक नहीं देखा; ऐसे कई तरह के लोग इस यात्रा में कंधे से कंधे मिलाकर आगे बढ़ रहे हैं. इन सभी ने स्वेच्छा से समय निकालकर इस यात्रा में जुड़ने का निर्णय लिया. मकसद साफ़ था – जनता के सेवक जो अब उनके शोषक बन गए हैं उन पर लगाम लगाना. एक ऐसी व्यवस्था बनाना जिसमें आम लोगों की सुनवाई हो और उनकी शिकायतों का समय पर निपटारा हो.

सामेसर में हुई सभा में सूचना अधिकार मंच जयपुर के कमल टांक ने बताया कि पिछले तीन महीनों से यात्रा लगातार प्रदेश के विभिन्न गांवों और शहरों में जाकर जवाबदेही कानून के लिए जनता का समर्थन हासिल कर रही है. उन्होंने बताया कि अब तक 40,000 से भी ज्यादा लोग अभियान के हस्ताक्षर अभियान को समर्थन दे चुके हैं और उससे कई गुना ज्यादा लोग नुक्कड़ सभाओं और जवाबदेही मेलों में आकर इस आन्दोलन से जुड़ चुके हैं. उन्होंने बताया कि यात्रा अब तक 30 जिलों में जा चुकी है और जोधपुर इस यात्रा का 31 वां जिला है.

पैर पसार रहा है सिलिकोसिस

सामेसर में यात्रा दल को पता चला कि यहाँ दर्ज़नों लोग सिलिकोसिस जैसे असाध्य रोग से ग्रसित हैं. उल्लेखनीय है कि पत्थर की खदानों में काम करने वाले लोग भारी संख्या में सिलिकोसिस के शिकार होते जा रहे हैं और सरकार अवैध खनन पर लगाम लगाने और मजदूरों को सुरक्षित रोज़गार दिलाने के बजाय उनकी मदद के नाम पर सिलिकोसिस पीड़ितों को एक लाख रुपये और सिलिकोसिस से जान गंवाने वाले मजदूरों के परिवारों को तीन लाख की राशि देकर अपने कर्त्तव्य की इतिश्री कर लेती है.

शेरगढ़ और सामेसर के साथ सेतरवा और बालेसर में भी यात्रा ने रैलिओं और नुक्कड़ सभाओं से अपने सन्देश को जन-जन तक पहुँचाया.

यात्रा से जुड़े महादेव रेगर ने बताया कि यात्रा कल जोधपुर के कई अन्य इलाकों में जाएगी और 2 मार्च को जोधपुर जिला मुख्यालय पर एक जवाबदेही मेले का आयोजन किया जायेगा. नागरिक 76763070907676307090नंबर पर मिस्ड कॉल कर इस आन्दोलन से जुड़ सकते हैं.

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें –

सूचना एवं रोजगार अधिकार अभियान, राजस्थान की ओर से

संपर्क – निखिल डे – 94140041809414004180, मुकेश – 94688622009468862200

कमल – 94134572929413457292

हरिओम – 94138317619413831761 अमित -0987352210409873522104

फ़िरोज़ खान
मीडिया कॉडिनेटर
एच एम् आर सी बारां ।

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हम 30 साल सरकार की सेवा
करे हमे मिले NPS और नेता सिर्फ
5 साल के लिए आये और वो
लाइफ टाइम पेंशन पाये।
अगर है हिम्मत तो सरकार अपने
सांसद की भी पेंशन को NPS में कन्वर्ट करे तो जाने की सरकार
देश के भविष्य के बारे में सोचती
है। तो सांसद की सभी मुफ़्त की
सेवाओ को बंद करे और देश के
भविष्य के बारे में सोचे।
***नई पेन्शन नीति के नुकसान ****
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अन्तर्राष्टीय श्रम संगठन के
अनुसार सरकार या रोजगार देने
वाले ( नियोक्ता ) की तरफ से
पेन्शन कोई एहसान नही है। बल्कि यह वेतन का ही हिस्सा
है जो कर्मचारी को सेवाकाल
के दौरान नही दिया गया , इस
प्रकार पेंशन अपने वेतन से काटा
गया पैसा है । भारत का
सर्वोच्च न्यायालय भी इसी बात को प्रमाणित करता है ।
संविधान के अनुसार भारत एक
लोक कल्याणकारी राज्य है
जिसके अनुसार बचपन और
बुढापा इन दोनो को
सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना सरकार का कर्तव्य है ।
जिसके तहत पेन्शन दी जाती
थी ।
लेकिन सरकार ने पेन्शन नीति
को समाप्त कर नई पेन्शन नीति
लागू की है वित्त मंत्रालय के पत्र एवं पी एफ आर डी एक्ट-
2013 सेक्शन – 20 के अनुसार हमे
नई पेन्शन नीति से निम्न
नुकशान होगे —
1- नई पेन्शन नीति के तहत
पुरानी स्कीम की तुलना मे 4 गुना से अधिक वेतन से कटौती
होगी , जिसके रिटर्न की
गारन्टी नही होगी ।
2- जी पी एफ की सुविधा से
वंचित किया गया ।
3- ग्रेच्युटी के लाभ से वंचित किया गया।आज के अनुसार 10
लाख का नुकसान ।
4- जमा राशि को सेवा से पहले
नही निकाल सकते ।केवल एक
या दो बार विशेष परिश्थिति
मे । 5- रिटायर मेन्ट के समय अपनी
जमा की गयी राशि का केवल
60 % ही निकाल सकते हैं
बाकी 40% शेयर मार्कट मे ही
लगाना पडेगा ।
6- सेवा मुक्ति से पहले मृत्यु होने , नौकरी छोडने पर 80% पैसा
पेन्शन फन्ड मे रख लिया
जायेगा और परिवार को 20%
ही रकम मिलेगी ।
7- रिटायरमेन्ट के बाद पेन्शन
सरकार नही बल्कि इन्शोरेन्श कम्पनी देगी जिसमे हम जमा
राशि का 40% निवेश करेंगे
पेन्शन उस राशि के मासिक
व्याज से कम होगी और मूल
राशि तो वह कम्पनी ही खा
जायेगी । आप कल्पना कीजिए कि हम
रिटायर हो चुके हैं और शेयर
मार्केट गिर गया है जिसमे
सारा पैसा डूब जाय और
सरकार जिम्मेवारी लेने से मना
कर दे । तब क्या स्थिति होगी और आपके बच्चो के पास
स्थायी रोजगार नही हो तब
क्या होगा ??
तब शायद हमारे पास कोई
रास्ता नही होगा तब बहुत देर
हो चुकी होगी , अभी हमारे पास वक्त है संघर्ष करने की
शक्ति है आओ संघर्ष की ओर बढ़े

इसे इतना शेयर करे की सरकार और न्यायालय की नींद खुल जाये और सभी कर्मी के साथ सही न्याय करे

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Jawabdehi yatra reaches Jodhpur tomorrow. A camp is being organised outside the collectorate from 10am. Hundreds of people from various communities from across jodhpur will be coming to file their complaints. Need lots of volunteers to help write complaints and fill applications. Please pass on this message to all your friends friends in Jodhpur.

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“एक उम्मीद”

राज्यस्तरीय जबावदेही यात्रा अपन सब को विधित है की जयपुर से रवाना हुई ओर यह पुरे राजस्थान के जिलो मे जाकर अब वापिस जयपुर जायेगी इसका उद्देश्य अपने साथ-साथ पुरे राजस्थान मे पता चल गया है हमारे ओर हमारे जैसे कई लोगो के जरिय जिसमें संचार-परिवहन सब कुछ शामिल है इस यात्रा के विसर्जन के बाद एकं मुहिम से जो जबावदेही कानून लागू का उद्देश्य है उसके लिये प्रयास किये जायेगे ऐसा मै सोचता हूं।।।।
मजदूर किसान शक्ति संगठन ने लोकतंत्र के हित मे कई कानून लागू कराये है आप जैसे महानुभावो के सहयोग से यह कानून भी बनेगा।।।।

ऐसी ही एक यात्रा “रोजगार अधिकार यात्रा” निकली थी ओर शुरूआत मे उसमे 40 यात्री थे ओर यह योजना भारत के कई राज्यो मे गई ओर उसकी मागं थी रोजगार गांरटी की मागं थी वो मैरे हिसाब से उनका भी महत्वपुर्ण योगदान रहा होगा रोजगार गांरटि लाने मे।।।

जबावदेही कानून से एक थाने मे आपका एफ आई आर लिखने का मना नही कर सकेगा उसकी जबाव देही तय होगी तो एक अध्यापक पुरा दिन जो तय समय है उसमे विधालय मे रहेगा हमे ओफीसो के चक्कर नही निकालने पङेगे।।।।।

वर्तमान मे कक्कू लाल बोलता है:- साब मारी फाईल जमा कराणी है।।।।।

वर्तमान मे बाबूजी (लिपीक):- भाई आज तो काम है कल आ जाणा देखकर जमा कर देगे (यह शब्द 10 दिन तक चलता है)

जबावदेही तय होगी तो:-

बाबूजी (लिपीक) बोलेगे फोन करके:- यार कक्कू लाल जी आपकी फाईल कल जमा करा दो नही तो तारिख चली गई तो मैने को ऊपर जबाव देणा पङेगा।।।

कक्कू:- ककू एक ही दिन शहर जाकर फाईल भी जमा करेगा, मुन्नी के कपङे भी लेगा, ओर हाथो हाथ घर आजायेगा।।।।।

एक समय कल के चक्कर मे आम आदमी के दस दिन निकल जाते थे आज उसी के एक दिन मे दस काम होगे तो वो उस आदमी का समय बरबाद नही होगा।।।

ऐसी ही उम्मीद भारत के हर कक्कू को जबावदेही कानून से होगी।।।।।।।।।

एक बार फिर मैं यात्रा से जुङे प्रतेयक व्यक्ती का आभार व्यक्त करता हू जल्द ही हमारे लोकतंत्र मे एक आधार खङा होगा ऐसी ही उम्मीद के साथ।।।।